Sunday

#Selfiewithdaughter कोई समाधान नही, एक पहल है

पिछले सप्ताह 'मन की बात' में प्रधानमंत्री जी ने हरियाणा के एक गाँव के सरपंच के #Selfiewithdaughter की सराहना की, साथ ही उन्होंने देशवासियों से भी आग्रह किया कि वे भी इस तरह की मुहिम में हिस्सा लें ।

देखते ही देखते, ट्विटर पर #SelfieWithDaughter एक ट्रेंड चल पड़ा, जो सिर्फ देश में ही नही विश्व स्तर पर भी ट्रेंड करने लगा ।

जाहिर सी बार है, किसी भी मुद्दे पर लोगों की राय अलग अलग हो सकती है, सो वैसा ही हुआ, जिसमे अभिनेत्री श्रुति सेठ की ट्वीट जो पूरे इस ट्विटर कैम्पेन से सहमत नही थी, उन्होंने अपनी असहमति प्रधानमंत्री के साथ दर्ज करायी, उसमे कोई बुरी बात नही थी ।

पर कुछ लोगों का इस पर रिएक्शन काफी निराशाजनक, अशोभनीय और बुरे स्तर का था । ये पूरे कैम्पेन का मूल ही ख़त्म कर देता है।

दूसरा ट्वीट जिसकी काफी आलोचना हुई वो थी कविता कृष्णन की ट्वीट, ये उस चलन को दिखाता है जो आजकल देखा जा रहा है कि कुछ स्वम्भू बुद्धिजीवी 'एंटी-मोदी' लिखने को बड़ा ही 'कूल' और 'इन्टलेक्चूअल' समझते है ।

यहाँ मैं उस पर ज्यादा बात नही करना चाहता हूँ।

पहली बात, इस बात मैं पूर्णतः सहमत हूँ कि ट्विटर पर कैम्पेन चलाना, इस तरह की समस्या का कोई हल नही है ।
पर इससे नुकसान भी तो कुछ नही है?
यहाँ मैं बताना चाहूँगा कि ट्विटर पर जो लोग ट्रेंड चलाते या बनाते है वो ज्यादातर शहरी यूजर होते है जहाँ समस्या इतनी गंभीर नही है।

जहाँ समस्या ज्यादा गंभीर है वो ट्वीटर चलाते नही है ।

तो फिर इसका क्या कोई फायदा है?

है,

क्योंकि, ये समस्या सदियों से है और भारतियों के रग रग में बसी सी लगती है, इस मामले में सरकारें योजनाएं बना सकती है और उन्हें लागू करा सकतीं है ।
और जहाँ सोच बदलने की बात आती है तो उसके लिए पहले की सरकारें भी प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सहारा लेती आयीं हैं ।

अगर इस बार, प्रधानमंत्री मार्केटिंग और प्रचार के लिए 'सोशल मीडिया' का सहारा लेते है तो इसमें बुरा क्या है?

अगर इस पूरे कैम्पेन को सकारात्मकता से देखा जाए तो कुछ बुरा नही है?

हाँ, अगर इस पूरे घटनाक्रम को "रेडिकल फेमिनिज़म" के चश्मे से देखेंगे, तो फिर अभी बात काफी लंबी चलेगी ।

Saturday

व्यावसायिकता तो कम नही है “हिंदी(Hindi)" में…फिर क्या कारण है कि “अंतर्जाल (Internet)" पर हिंदी की स्थिति इतनी अच्छी नही है?

index

हिंदी भाषा को अगर उसके बोलने वालों की संख्या और भौगोलिक प्रसार की द्रष्टि से देखा जाए, तो पता चलता है कि हिंदी विश्व की मुख्य भाषायों की सूची में एक अहम् स्थान रखती है | पर अगर इसको  इन्टरनेट पर प्रचार प्रसार की द्रष्टि से देखा जाए, तो अन्य भाषायों (अंग्रेजी को छोड़कर) से काफी पीछे है |

जब इसके कारणों पर चर्चा करते हैं तो कई कारण है जो सामने आते हैं, जैसे जो हिंदी पढता, बोलता है वो इन्टरनेट पर बहुत कम संख्या में हैं, हिंदी में इन्टरनेट पर ज्यादा कंटेंट नही हैं, हिंदी लिखना आसान नही है इत्यादि इत्यादि |

पर अगर हम सभी कारणों पर अगर ध्यान से सोचें तो पता चलता है कि ठीक इसके उल्ट चाहे वो सिनेमा हो या टी.वी. या फिर विज्ञापन की दुनिया,  वहां हिंदी को लेकर नए प्रयोग भी किये जा रहे हैं, जैसे क्रिकेट के पुर्णतः हिंदी चैनल और भी सभी न्यूज़ और डेलीशॉप भी हिंदी में ही हैं …और वो अच्छा भी कर रहे हैं,

कुल मिलाकर कह सकतें हैं कि टी.वी. एडवरटाइजिंग और सिनेमा में हिंदी को अंग्रेजी से कोई खतरा नही दिखता …तो यहाँ तो हिंदी को अगर व्यावसायिक (Commercial) नजर से देखा जाए…तब भी काफी सफल है |

तो ऐसा क्या है ..जो इन्टरनेट पर हिंदी की रफ़्तार को मंद किये हुए है ?

पहला तर्क हो सकता है कि हिंदी पढने और बोलने वाले ज्यादा संख्या में इन्टरनेट इस्तेमाल नही करतें है ….मैं इस तर्क से सहमत नही, क्योंकि युवा से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक ..बड़ी तादात है जो हिंदी बोलती है और इन्टरनेट यूज कर रही है |

ऐसा भी नही है कि हिंदी में साइट्स की कमी है …लगभग सभी बड़ी बड़ी साइट्स के ‘हिंदी वर्जन' हैं …जैसे फेसबुक, गूगल, जी-मेल, IRCTC सभी की  हिंदी साइट्स हैं |

जो हिंदी लिखने की बात आती है, वहां पर भी अब गूगल और माइक्रोसॉफ्ट और कई अन्य के इनपुट टूल्स आने के बाद हिंदी लिखना बहुत ही आसान हो गया है |

तो फिर क्या कारण है ?

मेरे अनुसार …लोग हिंदी बोलते तो हैं ..पर पढ़ने या लिखने से कतराते हैं |

इसमें दो बातें हैं, लोग तभी तो पढेंगे या सर्च करेंगे …जब उन्हें सामग्री हिंदी में उपलब्ध मिलेगी |

और ज्यादातर स्वदेशी ब्लोगर/लेखक भी अंग्रेजी में ही लिखते हैं ..अब उनका तर्क होता है …कि हिंदी कोई पढ़ता नही हैं और पाठकों का तर्क होता है …कि हिंदी में कोई लिखता नही |

इन दोनों में बेहतर बैलेंस ही हिंदी के स्थिति को सुद्रढ़ कर सकता है …हिंदी में जब अच्छा लिखा जायेगा …तो कुछ हो सकता है ..आगे

पर मैं तो सकारात्मक हूँ …कई लोग तथा संस्थाएं इस दिशा में अपना अथक योगदान दे रहीं हैं , पर इसमें प्रशासन को अब निर्लज्जता को त्यागकर …हिंदी के लिए खानापूर्ति छोड़कर सार्थक प्रयास करने होंगे ..ऐसा चाइना ने कर दिखाया है …अपनी “भाषा" को लेकर …हम क्यों नहीं कर सकतें है |

मुझे इस पर और भी कारण जानने हैं, कृपया अपनी राय जरूर दें |

Sunday

व्हाटसएप्प इमेजिज को गैलरी में कैसे छुपायें (How to hide WhatsApp images from Gallery)

WhatsApp अब लगभग सभी स्मार्टफोन यूजर्स के लिए दैनिक संपर्क, संवाद , शेयरिंग और चैटिंग का माध्यम बन चुका है, इसमें कोई दोराय नहीं है ।

अब जब ये फ्रेंड्स, फैमिली और वर्क लाइफ सभी से जुड़ चुका है, तब कई बार ऐसी परिस्थितयां आ जाती है, जब आपका कोई न कोई फ्रेंड आपकी प्राइवेसी को ताक पर रखकर, आपको कुछ ऐसी तस्वीरें (Images) या विडियो (Video) शेयर कर देतें है, जो आपके फैमिली सदस्य के सामने आपको असहज स्थिति में डाल सकतें हैं ।

अब ऐसी स्थिति में आपके पास एक विकल्प है कि गैलरी (Gallery) को ही लॉक कर दिया जाए, पर इस अवस्था में आप और भी शक के घेरे में आ सकते हो ..

दूसरा विकल्प बचा, कोई ऐसा तरीका हो जिससे सिर्फ WhatsApp Images और videos लॉक हो जाएँ , वो भी बिना किसी एप्प के ।

चलो, दूसरा विकल्प ही बताते हैं ...आपको

इसके लिए आपके पास एक File Explorer app होना चाहिए, जो लगभग सभी फोन में होता ही है, मैं यहाँ ES File Explorer के जरिये आपको बता रहा हूँ ।

1. File Explorer ओपन कीजिये और वहां से आप Home-> sdcard-> WhatsApp > Media ->WhatsApp Images फोल्डर तक पहुँचिये ।

  7 June 2015 84534 am IST

2. फोल्डर के अंदर .nomedia नाम से एक नई फ़ाइल बना लीजिये ।

7 June 2015 91301 am IST

या फिर सिर्फ "WhatsApp Images" फोल्डर को ही ".WhatsApp Images" नाम से रीनेम कर दीजिये ।

इसके बाद आपको गैलरी में कोई WhatsApp images नही दिखेगीं । पर ध्यान रहें ये images रहेंगी आपके फोन में ही ...इन्हें आप इसी फोल्डर (File Explorer के जरिये) आकर देख सकतें है ।

अगर आपको फिर से ये फोल्डर गैलरी में दिखाना है तो उक्त फ़ाइल (.nomedia) डिलीट कर दीजिये, अगर साधारणतः ये फ़ाइल आपको दिखे नही, इसका मतलब ये hide होगी, उसको unhide करने के लिए Es File Explorer के Main Menu  के Tool आप्शन से unhide कर सकतें हैं ।

ऑनलाइन शॉपिंग कैसे करें ? [Online Shopping guide in Hindi]

आजकल इन्टरनेट यूजर्स के लिए ऑनलाइन शॉपिंग कोई नया शब्द नही है, साथ ही जो अभी तक इन्टरनेट से नही जुड़े हैं, उनमे से भी कईयों को भी  टी.वी., समाचार-पत्र और बाहर भी विज्ञापनों के माध्यम से इसका पता चल चुका होगा |

बेशक अपने देश ने पिछले 2-3 सालों में इस क्षेत्र में अप्रत्याशित वृद्धि हासिल की है, और  कई रिसर्च और सर्वे  एजेंसियां इसके अगले 2 सालों में दुगुना होने का भी अनुमान लगा रहीं है; इस लिहाज़ से अभी एक बड़ी संख्या में नए लोग ‘ऑनलाइन शॉपिंग' करने वाले हैं |

कई लोग ऐसे भी हैं, जो इन्टरनेट तो यूज करतें हैं, पर ‘ऑनलाइन शॉपिंग' के बारे में ढेर सारी शंकाएं हैं, जिस वजह से वे इससे दूर हैं, मेरे पास कई मित्र पूंछते हैं कि …क्या ‘ऑनलाइन शॉपिंग’ सुरिक्षित है ? और ये कैसे की जाती है ?

नए यूजर्स के लिए, मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ, व्यक्तिगत रूप से मैं ज्यादातर शॉपिंग ऑनलाइन ही करता हूँ |

यहाँ मैं फ्लिप्कार्ट (Flipkart) के जरिये शुरू से अंत तक, कोई प्रोडक्ट खरीदनें का पूरा प्रोसेस बता रहा हूँ,  ये प्रक्रिया और दूसरी साइट्स जैसे Snapdeal, Amazon की भी प्रक्रिया समान ही है |

1. Flipkart.com का होमपेज :

flipkart1

2. साईट पर अकाउंट बनाना (Sign up):

Flipkart पर अकाउंट बनाने के लिए आपके पास एक ई-मेल पता होना चाहिए, और एक पासवर्ड जो आप अपनी मर्जी अनुसार चुन सकते हो |

flipkart-signup 

3. अपना प्रोडक्ट सर्च करना :

आप यहाँ जो प्रोडक्ट खरीदना है, वो सर्च भी कर सकतें हैं या फिर केटेगरी के जरिये भ्रमण करते हुए, वहां तक पहुँच सकते हो |

उदाहरण के लिए मैं यहाँ जियाओमी (Xiaomi) कंपनी का Redmi 2s मॉडल, जो सिर्फ ऑनलाइन ही ख़रीदा जा सकता है, और वो भी सिर्फ फ्लिप्कार्ट(Flipkart) से ही, उसके बारे में बता रहा हूँ |

flipkart2

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

4. प्रोडक्ट पेज :

सर्च के जरिये या केटेगरी के जरिये आप प्रोडक्ट के मुख्य पेज पर पहुँच गए है, यहाँ आपको प्रोडक्ट के बारे सारी जानकारी मिल जायेगी, जिन बातों पर ज्यादा ध्यान देना हैं वो हैं प्रोडक्ट की रेटिंग, रिव्यु (review), सेलर (Seller) की रिव्यु, कीमत, ई.एम.आई, फ़ोटो, कलर, विवरण, प्रोडक्ट के बारे में पूरी जानकारी आदि आदि |

सभी बातों को ध्यान से पढ़ लें |

flipkart3

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

“Buy Now” पर क्लिक करके एक प्रोडक्ट खरीद सकते हो, अगर आप एक से ज्यादा प्रोडक्ट्स खरीदना चाहते हो, पहले प्रोडक्ट “Add to card” पर क्लिक करके …”शॉपिंग कार्ट" में इकठ्ठे करते जाईये, बाद में एक साथ “चेक-आउट” और “पेमेंट (Payment)” कर सकते हो |

5. पता दर्ज करना :

अगर आप अपनी शॉपिंग पूरी कर चुके हैं, और जब “Buy Now” या “Check out” पर क्लिक करेंगे, तब आपके सामने आखिरी पेज होगा, जिसमे आपको अपना पता , जहाँ आपको वो प्रोडक्ट चाहिए , भरना होगा |

flipkart5

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6. आर्डर विवरण (Order detail)

पता भरने के बाद आपको अपने आर्डर के बारे पूरी डिटेल दिखाई देगी, जिसमे अनुमानित पहुँचने का समय, कुल राशि जो आपको भुगतान करनी है आदि आदि |

अगर आपके पास कोई कूपन कोड, ऑफर कोड है तो वो भी आप यहाँ आजमा सकते हो, अगर सही हुआ तो उतनी ही राशि कुल राशि से कम हो जायेगी |

flipkart6 

7. भुगतान विकल्प (payment options):

वैसे तो लगभग सभी शॉपिंग साइट्स पर नेटबैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, ई.एम.आई. , कैश कार्ड और “कैश ऑन डिलीवरी" विकल्प मौजूद होतें हैं, भुगतान करने के लिए, पर नए ग्राहक ज्यादातर “कैश ऑन डिलीवरी(COD)" चुनते है, जिसमे कि आपको पैसे तब देने होते हैं, जब आपको प्रोडक्ट मिल जाता है |

अगर इसके लिए अतिरिक्त शुल्क होगा, तो बिल के टोटल में जोड़ दिया जाएगा, जो आपको इसी पेज पर पता चल जाएगा |

flipkart7

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

8. आर्डर कन्फर्म कीजिये :

“Confirm Order” पर क्लिक करके आप अपना आर्डर कन्फर्म कर दीजिये | इसके बाद आपको इसका एक कन्फर्मेशन न. मिलेगा, जो आपके ई. मेल तथा मोबाइल पर एसएमएस के जरिये भी मिल जायेगा |

अगर आप आर्डर को कैंसिल करना चाहते हैं, तो इसी पेज से कैंसिल(Cancel) भी कर सकते हैं |

flipkart8

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस पोस्ट का मकसद सिर्फ नए लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताने के लिए था, किसी एक साईट विशेष का प्रचार करना नहीं, अब किसी न किसी साईट का तो सहारा लेना ही पड़ता, सो flipkart को चुना |

वैसे अन्य साइट्स जैसे snapdeal.com , amazon.in , infibeam.comका प्रोसेस भी लगभग समान ही है |

अपने एंड्राइड फोन पर प्रतिदिन स्वतः नया वॉलपेपर कैसे लगायें [Daily auto changing Android Wallpaper]

अगर आपके पास एंड्राइड फ़ोन है, और आप उसको सजाने सवांरने में ज्यादा समय बिताते है तो उसमे काफी समय तो बढ़िया सा वालपेपर का चयन में गुजरता होगा ।

तो अगर आपको कोई ऐसा तरीका मिल  जाएँ  जिससे आपको  प्रतिदिन एक बेहतरीन वॉलपेपर आपकी होमस्क्रीन पर लगा हुआ मिले, वो भी बिना कुछ किये, तो कैसा रहेगा ?

न जी न कोई ऐसा वैसा एप्प (Apps) का सुझाव नही देने वाला हूँ, जो विज्ञापनों से पटा पड़ा हो, जिससे कि आपका डेटा (Data) और RAM को अनावश्यक रूप से बर्बाद करें ।

IFTTT logoमैं यहाँ आपको एक बेहतरीन वेब आधारित सर्विस  से परिचय कराने जा रहा हूँ, जिससे हो सकता हो आप में से बहुत से  लोग पहले से ही परिचित हों, फिर भी जो नये हैं ...उनके लिए ...!

IFTTT (इफ्ट):

अगर हम IFTTT शब्द को ही देखें ...तो इसका पूरा मतलब समझ आ जायेगा कि ये है क्या ...ये संक्षेप रूप है .."If This Then That" वाक्य का ।

यहाँ "This" की जगह पर कोई वेब सर्विस (जैसे जीमेल, फेसबुक, ट्विटर आदि आदि ) को रख लीजिये ....और "Then" की जगह पर कोई ट्रिगर(कोई कंडीशन)  और फिर "That" की जगह पर कोई दूसरी वेब सर्विस .....।

कुल मिलाकर ...IFTTT एक ऐसी वेब सर्विस है, जिससे आप किसी एक  वेब सर्विस की किसी शर्त पूरी होने पर किसी दूसरी वेब सर्विस को स्वतः चला सकते हो । 

इस तरीके से तैयार हुई पूरी लॉजिकल चेन (Chain) को यहाँ "रेसिपी (Recipe)" कहते है और उपलब्ध वेब सर्विसेस को यहाँ "चैनल (Channel) बोला जाता है ।

यहाँ पर बहुत सी उपयोगी "रेसिपी (Recipe)" पहले से ही बनी पड़ी हैं .....बस आप अपनी जरुरत के अनुसार अपनी थाली में सजाते जाईये ।

अब सीधे विषय पर आता हूँ, कि IFTTT के जरिये ...आप अपने Android होमस्क्रीन का वॉलपेपर प्रतिदिन स्वतः कैसे चेंज कर सकते है ।

इसके लिए कई रेसिपी हैं यहाँ ..जिन्हें आप सर्च कर सकते हो ...या अपनी खुद की भी रेसिपी बना सकते हो,

 मैं यहाँ आपके साथ जो रेसिपी शेयर करने जा रहा हूँ ..वो 500px साईट पर Editor's Choice में से एक वॉलपेपर प्रतिदिन आपके फोन के वालपपेर के रूप में लग जाया करेगा ।

इसके लिए आपको पहले IFTTT का एंड्राइड एप्प डाउनलोड करके Android device चैनल सक्रिय करना पड़ेगा, फिर चाहे तो आप उसी एप्प से भी ये रेसिपी सर्च करके सेट-अप कर सकते है या फिर PC या Laptop पर वेबसाइट से भी कर सकतें हैं ।

वेबसाइट रेसिपी की लिंक नीचे शेयर कर रहा हूँ ।
IFTTT Recipe: 500px Editor's Choice to Android Wallpaper connects 500px to android-device
 
 वेबसाईट या फिर एंड्राइड एप्प दोनों जगह जो बाते ध्यान रखनी हैं, वो हैं दोनों चैनल 500px पर Android सक्रिय होने चाहिए | 500px चैनल जब आप सक्रिय करने जायेंगे, तब आपको अपनी मनपसंद वॉलपेपर केटेगरी चयन करने का भी विकल्प भी मिलेगा, जिसे आप बाद में चेंज भी कर सकते हैं |

एप्प में स्टेप-बाई-स्टेप (Step by Step):

1. Android device चैनल सक्रिय करें :

एप्प में ही होमस्क्रीन के ऊपर दाहिने ओर My recipe icon पर टैप करके ..फिर Setting icon टैप करके Setting भाग पहुँचिये, जहाँ आपको चैनल आप्शन मिलेगा |





यहाँ सर्च करें Android device ....ओपन करके इसे activate कर दीजिये |


2 .इसी तरह 500px चैनल को भी सक्रिय कर लीजिये |


३. अब My Recipe पेज पर वापिस जाईये, यहाँ (+) icon पर टैप करके, उपरोक्त रेसिपी को सर्च  करके सक्रिय कर लीजिये | यहाँ से आप रेसिपी को जांच, सम्पादित या हटा भी सकते हो |

 
यहाँ वॉलपेपर स्वतः चेंज करने का तरीका मैंने जानभूझकर IFTTT के जरिये बताया, जिससे की आपका परिचय IFTTT से करा सकूं, और इसकी  असीम संभावनाओं से भी |


आगे समय समय पर IFTTT की बेहद उपयोगी रेसिपी शेयर करता रहूँगा |
 

Thursday

यादें कोच्चि (Kochi) की: ब्लोगर्स, बीच और क्रिसमस (भाग- 1)

कोच्चि (या कोचीन ) का नाम आते ही प्राचीनता और ऐतिहासिकता स्वतः ही जेहन में आ जाती है, कोच्चि भारत के दक्षिण छोर पर केरल राज्य के तटवर्ती जिले ‘एर्नाकुणम’ का एक शहर है | इसका महत्त्व सांस्कृतिक के साथ साथ व्यावसायिक भी काफी है |

ये तो रहा शहर के बारे में एक संक्षिप्त परिचय, अब बताते है अपनी यात्रा का अनुभव…….,

पोस्ट के शीर्षक में “ब्लोगर्स” शब्द बताता है कि मेरी इस यात्रा का ब्लोगिंग से जरूर कुछ ना कुछ कनेक्शन रहा होगा, हाँ तो बताते है, दरअसल इंडीब्लोगर (IndiBlogger) पर निसान इंडिया (Nissan India) द्वारा प्रायोजित एक कॉन्टेस्ट था, जिसका विषय था – ‘सड़क सुरक्षा (Road Safety)’

जिसमे से टॉप 5 विजेता को कोच्चि में हो रहे Nissan Safety Driving Forum (NSDF) के इवेंट में भाग लेना था, उसके 5 विजेतायों में से किन्हीं दो विजेतायों के कोच्चि जाने में असमर्थता जताने पर, मुझे मौका दिया गया | मेरी इस कॉन्टेस्ट में भेजी गयी पोस्ट को यहाँ से पढ़ सकते है |

दिल्ली से जाने वाले प्रतिभागियों में मेरे अलावा दिल्ली से ही ब्लोगर  Manjulika Pramod थी, उनकी पोस्ट आप यहाँ से पढ़ सकते है | इनके अलावा मुंबई से Khushboo Motihar, चेन्नई से Kishore Kumar और जयपुर से Prasad Np जी थे ..

हमारी फ्लाइट ने हम लोगों कोच्चि में करीब 11:00 am पर पंहुचा दिया, दिल्ली से चले थे ..पूरी तरह पैक होगे ..तब भी सुबह सुबह कंपकंपी वाली हालत …कोच्चि में हम स्वेटर, जर्सी वाले इक्का-दुक्का लोग …सिर्फ अपनी ही तरफ देख रहे थे …कि कब ये गरम कपडे उतारे ..और कुछ राहत  मिले |

IMG_20141220_115630

एयरपोर्ट से आगे का रास्ता, साईट-सीइंग  और ठहरने के ठिकाने के लिए हम लोगों को कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं थी, सारा कुछ पहले से ही तय था, एयरपोर्ट पर कैब आ गयी थी, वहां से कैब में बैठे …और वहां से पहले होटल जाना ही उचित समझा |

एयरपोर्ट से होटल की दूरी करीब 35 km थी, उस दूरी के बीच भी काफी कुछ नया देखने को मिला …और कुछ वहीँ पुराना जो दिल्ली जैसा ही था …पहला आश्चर्य मुझे तब हुआ जब कैब में हिंदी गाने बजते हुए सुने …तब कैब ड्राईवर का परिचय जानने की भी उत्सुकता हुई ..तब पता चला कि वो हिंदी में अच्छी तरह से बात कर सकते है …और एक्स-सर्विस मैन थे CRPF के  ..

रास्ते में दिल्ली से जो अलग बात दिखाई दी वो थी लोकल ट्रांसपोर्ट …बड़े स्तर पर आपको लाल रंग की प्राइवेट बसें ही दिखाई देंगी, जो कुछ कुछ तो दिल्ली में पहले चलने वाली ब्लू-लाइन बसों जैसी लगती है, नया इनमे ये था …कि किसी भी बस में खिडकियों के शीशे नही थे …कारण समझ नही पाया …दूसरे दिन Prasad जी ने इसका एक कारण बताया कि द. भारत में वामपंथियों का प्रभुत्व ज्यादा होने की वजह से आये दिन हड़ताल, चक्का जाम, पथराव होना आम बात है , इसीलिए यहाँ के बस मालिक शीशा लगवाते ही नही है ……Smile

 

Bus ride costliest

ये पिक्चर मेरे कैमरे की खींची हुई नही है, कैब में चलते चलते संभव भी नहीं हो पा रहा था, कि फोटो ले सकूँ, तो इसके मूल फोटोग्राफर का आभारी हूँ मैं….

इसके अलावा भी बहुत कुछ नया था ..जैसे दिल्ली के तरह राजनीतिक पार्टियों के विज्ञापनों से पड़ी पड़ी दीवारें नही थी, नारियल और केले के पेड़ों की बहुतायत, फॉर्मल वेशभूषा में पेंट की लुंगी, दिल्ली के पानी के ठेले की जगह पर नारियल पानी के ठेले ..आदि आदि |

अब बताते है कि दिल्ली और यहाँ एक जैसा क्या था …वो था ..ट्रेफिक जाम, मनमानी ड्राइविंग स्टाइल (चाहे तो इसे इंडियन स्टाइल ऑफ़ ड्राइविंग कह सकते हैं), मेट्रो का कंस्ट्रक्शन ….

जी हाँ, मेट्रो का कंस्ट्रक्शन …पहली बार तो मुझे भी लगा कि कहीं दिल्ली में ही तो नहीं है …क्योंकि यहाँ के मेट्रो का भी काम DMRC के सहयोग से ही किया जा रहा है, अब आप यही द्श्य देखिये …

2JPXDDH

 

आपको बता दूँ …कि ‘मेट्रोमैन’ श्रीधरन जी भी केरल से ही हैं और कोच्चि मेट्रो में भी श्रीधरन जी का अहम योगदान रहने वाला है |

ट्रेफिक की बात करूँ …तो हालात बहुत ही ख़राब थे …ड्राईवर ने स्पष्टीकरण जरूर दिया कि आज छुट्टी का दिन है …और कोच्चि का एकमात्र और सबसे बड़ा शोपिंग मॉल …लुल्लु मॉल (Lullu Mall) ..भी रास्ते में है ..इस वजह से ज्यादा जाम है …पर ये बात मुझे तो पची नही ….

कभी कभार तो लगता है कि अपने देश की ये बेहद गंभीर समस्या बनती जा रही है …और दूसरी तरफ हमारे नीति निर्माताओं की  इसमें कोई गंभीरता दिखती नही है |

ट्रेफिक में धीरे धीरे चलते हुए हम लोग होटल पहुँच गए होंगे …करीब 1:30 pm के आस पास ….फिर वहां से निकलें होंगे करीब 2:30 – 3:00 pm के आस पास …

अब हम लोगों को तय करना था कि शाम तक ..कम समय में कौन से साईट देखकर वापस आया जा सकता था …होटल के  सबसे पास था …”परदेसी सिनगॉग”

1. परदेसी सिनगॉग (Pardesi synagogue) :

IMG_20141220_161203

 जी हाँ, सिनगॉग (synagogue) - यहूदी उपासनागृह,  जिसका नाम “परदेसी” शब्द से शुरू होता है, हैं ना रोचक, रोचक के साथ साथ ये काफी पुराना और ऐतिहासिक भी है, इसके नाम में जो “परदेसी” शब्द लगता है, उसका कारण ये है कि ये मूलतः स्पेनिश बोलने वाले यहूदियों द्वारा बनवाया गया था |

ये सिनगॉग अपने आप में इसलिए भी काफी महत्त्व रखता है कि पूरे राष्ट्रकुल (कॉमनवेल्थ) देशों में ये एकलौता सबसे पुराना सक्रिय सिनगॉग है | ये कोचीन के सबसे पुराने टाउन में से एक “जू टाउन (Jew Town)” में स्थित है |

“जू टाउन (Jew Town)” और “जू स्ट्रीट (Jew Street)” अपने आप में ही विरासत है, जहाँ भारत के यहूदियों की एक बड़ी संख्या रहती है |

पर दुर्भाग्यवश जब हम लोग  सिनगॉग (synagogue) पहुंचे तो ये बंद था, क्योंकि ये शनिवार को बंद रहता है, पर कोई बात नही, हमारे पास कल (रविवार) का समय और था, दूसरे दिन (रविवार) को हम लोगों ने सिनगॉग (synagogue) अन्दर से भी देखा |

अन्दर तो फोटोग्राफी की अनुमति नही थी, पर अगर आप अन्दर की वास्तुशिल्प देखना चाहें तो विकिपीडिया पर उपलब्ध ये एल्बम देख सकते हैं |

Jewish synagouge kochi india.jpg
"Jewish synagouge kochi india". Licensed under CC BY 2.5 via Wikimedia Commons.

Kochi Jewish Synagogue C.jpg
"Kochi Jewish Synagogue C" by Wouter Hagens - Own work. Licensed under Public Domain via Wikimedia Commons.

अपने आप में इतनी प्राचीन (सन 1567 ) विरासत को देखने का अनुभव ही बेहद अहम् रहा मेरे लिए …

इसके हम लोग “जू टाउन (Jew Town)” और “जू स्ट्रीट (Jew Street)” होते हुए …वापस होटल की तरफ निकल पड़े …पूरे दिन की थकान तो थी ही ..और साथ में अन्य साथी ब्लोगरों (चेन्नई और मुंबई से आने वालों ) से मिलने की जल्दी, सो फिर रास्ते में कुछ नहीं देखने की सोची, और अँधेरा भी हो चुका था |

२. “मैरीन ड्राइव बीच ” ( Marine drive, Kochi)

पर जैसे कैब ड्राईवर ने बताया कि “मैरीन ड्राइव बीच ” आ गया है, तो फिर मुझसे नही रहा गया, सारी थकान को एक तरफ रखकर …निकल  पड़े क्रिशमश के चलते ….दिवाली की तरह सजाये गए ..”मैरीन ड्राइव” …पर ..थकान के बावजूद ..करीब करीब आधा कि.मी. बीच चलते चलते पार किया ..तब पहुंचे मुख्य आकर्षक “रेनबो ब्रिज” पर …

Marine Beauty 3 DSW.jpg
"Marine Beauty 3 DSW" by Augustus Binu/ www.dreamsparrow.net/ facebook - Own work. Licensed under CC BY-SA 3.0 via Wikimedia Commons.

उसके बाद सीधे होटल …

ये थी मेरी पोस्ट की पहली किश्त ..दूसरे दिन के लिए दूसरी पोस्ट की लिंक जल्दी ही शेयर करूँगा | 

Wednesday

Safety isn't expensive, its priceless

Safety is as simple as ABC - Always Be Careful.

Either in road or in any other aspects of life, Be always careful towards your risks, because “Precaution is always better than cure”, and It is better to lose one minute in life... than to lose life in a minute.

If we look upon road crashes figures of India, then it would be shocking, there's one death reported every 4 minutes on the streets of India, and we have highest no. of deaths due to road accidents, mainly from young ages.

So, as a citizens of India, it is our core responsibility to safe self and other precious life by following traffic laws on road.

Here, I don’t to discuss causes of road accidents in deep, it is crystal clear that many of accidents happens due to our ignorance on road.

In my views, below are the few my suggestions for road safety:

    1. Cell phones or any other distracting activity should be completely ban while driving

 

Around 80% road crashes happens due to distraction while driving, even it can be more than from drunk drivers. because distracted driving is engaging in any non-driving activity that increase the risk of crashing like eating, drinking, using GPS, talking to passengers, talking on phone or texting on phone etc.

From the above, texting involves the highest degree of driver distraction, because it involves all three types of distraction visual, manual & cognitive.

 

texting

first of all, as a responsible driver, it should be our duty, to avoid cell phone while driving, but central government should also think to completely ban use of cell phone while driving.

2. Always follow traffic rules

 

 

 

Traffic rules are made for to follow, these are not a joke…seriously, if you are treating these rules like a joke, then “death” would be punch line for that.

So it is simple like a poem:

trafiic rules

3. Respect cyclists, pedestrian and kids on road:

 

 

 

 

Cyclist, pedestrian and kids are more vulnerable in road accident, so as motorist, it is our duty to ensure better safety for pedestrian specially for kids and senior citizens.

Stop your vehicle behind the pedestrian crossing and not over it. be more careful and slow down near schools.

kids4. Never drink and drive 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

It is not need to repeat again and again, that don’t drink and drive, because all of us know about it, but as a post safety driving it become very important to mention this message once again.

d

at the end,

Safety isn't just a slogan, it's a way of life.

 

In India, NISSAN SAFETY DRIVING FORUM (NSDF) conducting the safety driving promotion activities, this campaign successfully reached close to 2 lakh citizens across 11 cities like New Delhi, Mumbai, Chennai, Chandigarh, Jalandhar, Jaipur, Vadodara, Nagpur, Chennai, Mangalore and Kochi.

You can know more about their efforts towards  promoting safe driving behaviour in India from the official website.

https://www.nissan.in/innovation/NSDF.html

“शौचालय” के लिए सब्सिडी नहीं….जागरूकता और इच्छाशक्ति चाहिए

एक देश जिसके युवा “विकसित” देश बनने का सपना देख रहे हो, उसमे 597 मिलियन लोग आज भी खुले में शौच करते हों, इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या हो सकती है | वो देश जिसके पास अपनी सबसे पुरानी  और समृद्ध सभ्यता हो, वो देश जब २१वीं सदी में भी खुले में शौच जैसी समस्या से निजात पाने के लिए लड़ रहा हो, तब यहाँ के जिम्मेदार नागरिकों की  जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है |

आज जब देश के प्रधानमंत्री विदेशों में जब अपने देश की समस्याओं को गिनाते है, तो उसमे “खुले में शौच” का भी जिक्र करते है, इससे सरकार की तो प्राथमिकता तो झलकती ही है, साथ ही हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, पर आज मैं यहाँ सिर्फ सरकारी स्तर पर इस समस्या के लिए क्या किया जा सकता है या क्या किया जा रहा है ..उस पर बात ना करके ..इसपर बात करना चाहूँगा कि हम आम नागरिक इसमें क्या कर सकते है |

क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना यही है कि ये सिर्फ सरकारी सब्सिडी से होना वाला नहीं है, इसके लिए लोगों में जागरूकता और इच्छाशक्ति का होना बहुत जरुरी है, उनका स्वयं ही इसकी उपयोगिता और आवश्कयता को समझते हुए इसमें भागीदार बनना …

इसके लिए घर में शौचालय होने के सबसे मजबूत पक्ष को मजबूती के साथ लोगों के सामने रखना होगा ..उसमे से एक है …”नारी की सुरक्षा तथा गरिमा”

  नारी की सुरक्षा तथा गरिमा

महिलायों के लिए, खासकर गांवों में “शौच” के लिए कोई उचित तथा सुरिक्षित व्यवस्था न होने के चलते आये दिनों हम समाचार-पत्रों में उनके साथ होने वाली अशोभनीय घटनायों के बारे में पढ़ते रहते हैं, इनमे कई तो बहुत ही गंभीर किस्म की होती हैं | ये तथ्य तो सभी के सामने खुला हुआ है …पर इसके अलावा भी कई छोटी छोटी बातें हैं …जैसे महिलायों की निजता, उत्पीड़न, शौच के लिए उन्हें सुरक्षित जगह ढूढने के लिए घर से काफी दूर बिना किसी सुरक्षा के जाना पड़ता है |

खासकर किशोरियों के लिए ये और भी अहम् हो जाता है , अगर हम Unisef की  रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में शौचालय की समुचित व्यवस्था ना होने से “ड्राप आउट अनुपात” में भी बढोत्तरी हुई है, साथ ही इससे लड़कियों में  अन्यत्रवासिता (ऐब्सन्टीइज़म) जैसी मानसिक अवसाद की स्थिति भी देखी गयी है |

अब बात करतें है, कि इस समस्या को ख़त्म करने के लिए हम सब को करना क्या है ?

जागरूकता ..और जागरूकता में इस मुद्दे को महिलायों और किशोरियों की गरिमा और सम्मान को जोड़ना है, जिससे कि इस अभियान को भावनात्मक रूप से और मदद मिलेगी |

अगर देखा जाए तो

188;200;02525f4365809ac2095c0404849c4bbfe7520726

इस क्षेत्र में सरकार के साथ साथ निजी क्षेत्र के भी अहम योगदान देखने को मिल रहा है,

उदाहरण के तौर पर “हिंदुस्तान यूनीलीवर” और “डोमेक्स (Domex)” की “#ToiletForBabli” मुहिम,

logo

जिसके अंतर्गत महाराष्ट्र और उड़ीसा को पूर्णतः खुले में शौच से मुक्त बनाना है, आपके http://www.domex.in साईट पर किये गए प्रत्येक क्लिक के बदले ये 5 रु० इस नेक काम के लिए योगदान स्वरुप जायेंगे | तो इस तरह से आप भी इस मुहिम का हिस्सा बन सकते है |

आपको सारी जानकारी http://www.domex.in साईट पर मिल जायेगी |

Monday

IRCTC का अधिकारिक एंड्राइड (Android) एप्लीकेशन (App) हुआ लांच

IRCTC की लगभग सभी को जरूरत पड़ती ही रहती है, और सभी का IRCTC से अपना अपना अनुभव रहा होगा, ज्यादातर …का बुरा .

उसके कारण को भी समझा जा सकता है, फिर भी पिछले कुछ दिनों से IRCTC ने अपने आप को कई गुना बेहतर किया, जैसे नई Next Generation E-ticketing System, e-wallet service और Windows 8 और Blackberry के लिए मोबाइल एप्प ..

बस इंतज़ार तो था …एंड्राइड (Android) के एप्लीकेशन का ..क्योंकि एंड्राइड जिस तेजी से विस्तार कर रहा है, उसको देखते हुए ..ये एप्प बहुत ही दिनों से प्रतीक्षित था | सो अंततः आज IRCTC ने अपना एंड्राइड एप्प IRCTC Connect नाम लांच कर दिया |

banner

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जिसे आप अपने फोन के Google Playstore ये इस लिंक पर क्लिक करके इनस्टॉल किया जा सकता है, पर इसके लिए आपके पास कम से कम Android 4.1 version होना आवश्यक है |

कुछ फीचर्स:

  • ट्रेन सर्च, टिकट बुकिंग
  • टिकट कैंसलेशन
  • आगामी यात्रा अलर्ट
  • नया यूजर रजिस्ट्रेशन

 

ये यहाँ स्क्रीन-शॉट्स का स्लाइडशो (SlideShow):

 

देखते हैं, इससे IRCTC अपने कितने ग्राहकों को खुश कर पाती है |

Sunday

महँगी दवाइयों के समकक्ष, दूसरी सस्ती जेनेरिक दवाईयों (Generic Medicines) को ऑनलाइन (Online) कैसे सर्च (Search) करें ?

आजकल ज्यादातर डॉक्टर्स जो दवाईयां प्रीस्क्राइब्ड (prescribed) करते है, उनका महंगा होने के पीछे, कंपनियों की तरफ से डॉक्टर्स को मिलने वाला मोटा कमीशन या इंसेंटिव भी एक बड़ा कारण होता है | इसको आप ऐसे भी देख सकते है कि अगर हम समान रासायनिक लवणों (Salt) और सूत्र वाली वही दवा किसी कम पोपुलर कंपनी या बिना ब्राण्ड की (generic) दवा लेते है, तो काफी सस्ती पड़ती है |

ये बात पहले से पब्लिक डोमेन में है, इस पर सरकार भी जोर देती रहती है कि जेनेरिक दवाईयों को बढ़ावा दिया जाये, पर भारी बाजारवाद के चलते, आखिर में सब ‘आम आदमी’ को ही झेलना पड़ता है |

यहाँ मैं दूसरी बात ये भी कहना चाहूँगा कि आप शुरू में ही अपने डॉक्टर से ही आग्रह करें कि वो जेनेरिक मेडिसिन ही प्रीस्क्राइब करे, साथ अपने डॉक्टर की सलाह के बिना मैं यहाँ किसी दवा को अपने आप बदलने के लिए मैं यहाँ बिलकुल नहीं कहने वाला हूँ, यहाँ मैं जो वेबसाइट बताने वाला हूँ, उनसे आप जानकारी ले सकते है, अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर विमर्श कर ले |

 

1. MedIndia.net

logo2

MedIndia.net पर आप मेडिसिन को जेनेरिक नाम के आधार, कंपनी के आधार पर उसके दूसरे समकक्ष मेडिसिन सर्च कर सकते हो, हाँ इस साईट पर विज्ञापनों और इसका यूजर इंटरफ़ेस की वजय से आपको थोड़ी से असुविधा हो सकती है , विज्ञापन  तो आप Adblock Plus Browser Add-on की मदद से हटा सकते हैं |

 

2. logoMyDawai: 
इस वेबसाइट का खास फीचर ये है कि इसके मोबाइल एप्लीकेशन भी है, जैसे एंड्राइड, एप्पल और फेसबुक एप्प , और दूसरा इसका वेब डिजाईन भी मोबाइल डिजाईन जैसा ही है, उसके साथ ही यहाँ पर जेनेरिक मेडिसिन, और दवाई निर्माता के नाम से भी सर्च कर सकते है |

 

3. MIMS.com   

1005811_10152433808939260_3589841348867010368_nMIMS.com का डेटाबेस (Database) सबसे ज्यादा प्रचलित और पोपुलर है, अपने देश में, मैं इसको यहाँ क्रम में थोडा नीचे इसीलिए रखा, क्योंकि इसकी इस्तेमाल करने के लिए आपको अपना अकाउंट रजिस्टर ( जो फ्री है ) जरूरी है | रजिस्ट्रेशन के बाद, आप इसे यूज करके देखिये, ये एक बेहतर विकल्प है, जहाँ आपको मेडिसिन से सम्बंधित कई और जरूरी जानकारियां भी मिलती है |

 

4. Getdavai header_logo :
इस साईट का डेटा (Data) का स्त्रोत का तो पता नही, पर यहाँ से पोपुलर मेडिसिन ब्रान्ड्स के समकक्ष दूसरी कंपनियों की मेडिसिन के नाम तथा कीमत बढ़ी आसानी से सर्च कर सकते है |


5. HealthKartPlus.com  

logo_big

HealthKartPlus.com के भी मोबाइल एप्लीकेशन है, जो काफी मददगार साबित हो सकते है, साथ ही इस वेबसाइट हा यूजर इंटरफ़ेस और डिजाईन काफी बढ़िया है, और फीचर्स भी सभी है , कुल मिलाकर ये भीं एक बेहतर साईट है |

Thursday

एंड्राइड (Android) फोन पर बोलकर हिंदी में कैसे लिखें ? (Voice to Text in Hindi)

आजकल अगर औसतन स्मार्टफोन का उपयोग देखा जाये तो करीब 5-6 घंटे तो आ ही जायेगा, जिसमे कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स , व्हाट्सएप्प और एसएमएस का एक अहम हिस्सा है | इसमें कोई शक नही है कि स्मार्टफोन ने लाइफ को सुगम करने में काफी मदद की है |

अगर हम टायपिंग को ही ले लें, तो पहले से अब तकनीक काफी परिष्कृत हुई है, खासकर हिंदी के क्षेत्र में, और हिंदी में गूगल के योगदान को नकार नही सकते हैं |

आज हम यहाँ बात करने जा रहें है, वौइस् टू टेक्स्ट (Voice to Text) टायपिंग की हिंदी में, वो भी आपके स्मार्टफ़ोन पर …बहुत ही आसान …नीचे के 5 स्टेप्स का अनुसरण करते जाईये |

 

१. Settings में जाकर आपको “Language & Inputs” पर टैप (क्लिक) कीजिये . (नीचे के स्क्रीनशॉट की भांति)

Screenshot_2014-08-10-18-11-48

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2. नीचे के स्क्रीनशॉट की तरह, Google Voice Typing के setting icon पर टैप कीजिये |

Screenshot_2014-08-10-18-12-21

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3. तीसरे स्टेप में “Select Input Language” पर टैप कीजिये |

 

Screenshot_2014-08-10-18-12-28

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

4. अब आप यहाँ से अपनी भाषा “हिंदी” चुन लीजिये |

Screenshot_2014-08-10-18-12-40

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

5. अब आपकी Voice to Text की डिफ़ॉल्ट भाषा हिन्दी हो गयी है, इसके बाद आप कहीं पर भी बोलकर उसको हिंदी में लिख  सकते है , उदाहरण के हम फेसबुक का एक स्टेटस लिखने के लिए Voice to Text का उपयोग करना चाहे तो …उसके लिए आपको निम्न स्क्रीनशॉट की तरह पहले कुछ सेकंड्स लगातार Space बटन दबाये रखना पड़ेगा, जिससे आपको Voice Typing का आप्शन चुनने को मिलेगा |

Screenshot_2014-08-13-23-04-16

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

6. बस हो गया …अब आप बोलते जाईये ..हिंदी में..उधर स्वतः ही टाइप होता रहेगा |

Screenshot_2014-08-10-18-15-56

Sunday

‘मोदी’ की दमदार जीत ..…मेरी नज़र से

नरेन्द्र मोदी जी  की अगुआई में बीजेपी को मिले स्पष्ट बहुमत से अब देश में एक स्थिर और मज़बूत सरकार का सपना तो पूरा हो गया, जो कि समय की मांग हो गयी  थी | अब अगर इस जीत का गुणा-भाग करने बैठे तो साफ़ साफ़ दिखने लगेगा कि ऐसा कैसे संभव हुआ ? तमाम “पोलिटिकल पंडितों” को झटका दे गए ये परिणाम जो गठबंधन के गणित में उलझे रह गए, और जनता की आवाज को नहीं महसूस कर पाए |

 

India State Election

इस स्पष्ट जीत के मायने और कारण जहाँ तक मुझे समझ में आते हैं, वो मैं यहाँ रखूँगा |

 

1. देश में आयी नेतृत्व शून्यता

अगर देखा जाए तो यूपीए-2 के शुरू से ही देश बिना किसी नेतृत्व के रेंग रहा था, अर्थव्यवस्था से लेकर महंगाई और भष्ट्राचार जैसे कई गंभीर मामलों पर देश के शीर्ष नेतृत्व का लगभग मौन रहना, न ही उसके उसमे संलिप्त होने का समर्थन करता दिखता था, अपितु देश के लिए ये आत्म-सम्मान का विषय भी था | अगर हम भष्ट्राचार के मामलों को छोड़ भी दें, तब भी चाहें वो राष्ट्रीय सुरक्षा की बात हो या भारत की कूटनीतिक स्थिति या फिर विदेश नीति, इन सभी मामलों में नेतृत्व नाम की कोई बात नज़र नही आयी |

 

अगर प्रधानमंत्री को छोड़ भी दिया जाए, फिर भी अन्य भी कोई मंत्री अपनी भूमिका को निभाता हुआ नहीं दिखा|

देश लगातार बदल रहा था, वो अपने देश का आत्म-सम्मान को वापस  लाना चाहता था, और इस बार उसने इसे ही चुना, जिसने दृढ और सशक्त नेतृत्व की बात की |

 

2. देश बदल रहा था

मोदी की जीत में सबसे बड़ा कारक जो था वो था कि मोदी जी ने उस “बदलाव" को महसूस कर लिया ..जिसकी सुबुगाहट अन्ना और रामदेव आन्दोलन के दौरान पता चली थी | वो बदलाव जो बता रहा था कि समाज अब “याची” ना रहकर “आकांक्षी" हो चला है, उसे अब खैरात नहीं चाहिए, उसे अब आत्म-सम्मान चाहिए, उसे बेरोज़गारी भत्ता नहीं चाहिए, उसे अब योग्यतानुसार रोजगार चाहिए,  वो अब खुद अपने बूते पर काम चाहिए था, उसे अपना “अधिकार” चाहिए था …कोई “उपकार” नहीं |

बस देश ने इस बार इसे ही चुना, करोड़ों युवा मतदातायों के लिए प्रथम प्राथमिकता थी ..रोजगार बस उसने इसी को चुना |

कांग्रेस के कई नेता , राहुल गाँधी के साथ जो अपने आप को युवा मानते थे वो भी 2004-2005 की दो चार योजनायों को घुमा घुमा कर अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों की तरह पेश करते रहे, और वो ये नहीं समझ पाए …इस रेंगती अर्थव्यवस्था और महगांई और भीषण बेरोज़गारी में मनरेगा मात्र “ऊंट में मुंह में जीरा” ही समान होता जा रहा था |

 

3. अवसरवाद, जाति, क्षेत्रवाद  राजनीति से परेशान आ गया था देश

1984 के बाद से किसी भी पार्टी को बहुमत ना मिल पाने के पीछे जो मुख्य कारण मैं समझता हूँ वो था भारतीय समाज के जटिल ताने बाने की कमजोर कड़ियों का फायदा उठाकर पनपीं कई अवसर और जातिवादी क्षेत्रीय पार्टियां , जिनके चलते गठबंधन सरकारें कई सारी जिम्मेदारियों को “गठबंधन धर्म” की अनिवार्यता या मजबूरी का नाम लेकर बच जाती थी | साथ ही ये पार्टियाँ भी अपने स्वार्थ सिद्ध करने में कामयाब हो जाती थी | जनता  अब इससे ऊपर उठना चाहती थी ….मोदी ने इसका आवाहन अपने “मिशन 272” के जरिये किया …जिसको जनता ने 282 करके दिया |

जनता की इस आकांक्षा को बीजेपी के अलावा कोई और पार्टी बिलकुल नहीं समझ पायी |

 

4. मोदी का नया और दमदार चुनाव प्रचार

इसके कई आलोचक होंगे, पर मुझे इसमें कुछ गलत नही लगता ..अगर आप वर्तमान को नही देख सकते तो भविष्य क्या देख लोगे ? मोदी ने शुरू से ही जिस शैली का इस्तेमाल किया वो भारतीय सन्दर्भ में नयी थी …ये अमेरिका की “प्रेसिडेंट स्टाइल” वाले चुनाव प्रचार से काफी मिलती थी …जिसमे उम्मीदवार पहले से ही जनता के सामने साफ़ होता है, वो किसे चुनने जा रही है, “संसदीय व्यवस्था” की कमजोरी के चलते “ एक्सीडेंटल प्रधानमंत्री” को जनता पिछले १० साल से झेल रही थी |

दूसरा एक बड़े समुदाय के समक्ष अपने आपको एकमात्र विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना, और उस बड़ी संख्या को अपनी तरफ मोड़ने के लिए सोशल मीडिया, 3D तकनीक, चाय चर्चा के जरिये सीधा संवाद, अपने विरोधियों को लगातार अपने ही मज़बूत बात (विकास मॉडल) के इर्द गिर्द घुमाने पर मजबूर करने में सफल होना ये सब सोची समझी , पूर्ण सुनियोजित योजना के तहत चुनाव प्रचार वाकई कुशल नेतृत्व का ही परिचय देता था |

 

यहाँ सभी कारण तो नहीं समेट पाया हूँगा, पर अपने हिसाब से कोशिस की है ..बाकी आपकी भी राय होगी और आप जरूर व्यक्त करें |

Friday

आगामी लोकसभा चुनाव में युवा भागीदारी और सोशल मोबाइल एप्स....


सर्वप्रथम आपको नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं
 
यह वर्ष काफी महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकिं इसी वर्ष देश में आम चुनाव होने वाले हैं, जिनके परिणाम सिर्फ पांच साल ही नहीं, आगे के लिए भी देश में काफी अहम भूमिका निभाने वाले हैं |
ऐसा इसीलिए, क्योंकि आने वाला दशक ..अब परिवर्तन का दशक साबित होने वाला है, पिछले कुछ राज्यों के परिणामों में कुछ कुछ स्थिति साफ़ भी की हैं |
अब बदलाव चाहिए, छुटकारा चाहिए इस पुरानी जंग लगी सोच से…”कछुआचाल सेदेश को रफ़्तार चाहिए ….

पर कौन करेगा ?

इतिहास बताता रहा है, कि परिवर्तन की शुरुआत ..हमेशा नयी सोच ने ही की है ….
तो फिर से एक बार जिम्मेदारी युवा पीढ़ी पर ही है ..पर इस बार असल में ये युवाहै कहाँ ?
आप कहीं हनी सिंहके गानों के बे-तरतीब दीवानों को? , “नशेको बुरा नही…”आधुनिकमानने वाले को ? ….अपनी सामाजिक जिम्मेदारी से भागने वाले को ?…..रात को डिस्को, पब्स में धुत पड़े दिशाहीन कुंठित युवको को ?……… तो युवा नहीं समझ रहे ?
मैं तो नही मानता हाँ, ये संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है |
युवावो ही है….जो अपनी जिम्मेदारी जानता है, वो अपना महत्व समझता है.और वो इस बार भी समझेगा |


पर कैसे ?


समय बदलता है, तो तरीके भी बदलते हैं, और इसका बेहतर इस्तेमाल करना इस पीढ़ी ने हमेशा किया है |
अब तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी हैं, कि काफी समस्याएं तो रहीं ही नहीं है, जो हैं ..उनको इसके बेहतर इस्तेमाल से बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है
आज युवा पीढ़ी के पास जो सबसे बड़ा इस्तेमाल है ..वो है बेशक इन्टरनेटऔरसोशल नेटवर्किंग
अब निर्भर इस बात पर है कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है, क्योकि ये महज एक माध्यम है, और किसी भी माध्यम की सार्थकता उसके उपयोगकर्ता पर ज्यादा निर्भर करती है |

अगर बात सटीक संवाद, संपर्कता की बात की जाए तो आजकल चल रहे मोबाइल सोशल एप्स जैसे कि WeChat, WhatsApps, Line आदि ज्यादा प्रासंगिक साबित हो रहे हैं
अगर यहाँ बात की जाए “WeChat” की


तो इसमें बेसिक कम्युनिकेशन से आगे बढ़कर भी कई ऐसे एडवांस्ड फीचर्स है, जैसे फ्री ग्रुप चैट, फ्री वौइस् चैट, फ्री विडियो चैट, लोकेशन के हिसाब से आपने निकट मौजूद अजनबी से भी चैट, कई सारे विजुअल स्टीकर जो कई शब्दों की बात अकेले कर सकतें है |
तो खूबियाँ तो सारी होती है जो एक बेहतर संवाद के लिए चाहिए बस सही से उपयोग करने की है


कैसे मोबाइल सोशल एप्सके जरिये ज्यादा से ज्यादा युवा जोड़े जा सकते है ?

कोई कुछ भी कह ले ..पर चाहे सोशल नेटवर्किंग साईट्स हों या मोबाइल सोशल एप्स” ..दोनों की मूलभावना आपस में जोड़ना ही है ..और वे उसमे कामयाब भी रहे है ..सोशल नेटवर्किंग साईट्स का अपना अलग स्थान है, जबकि अब इन मोबाइल सोशल एप्सका भी स्थान तेजी से बदल रहा है , ये ज्यादा करीब हैं, सुगम, सरल और ज्यादा वास्तविक से हैं ..

मैं यहाँ उदाहरण के लिए, WeChat को लेकर चलता हूँ, कि ये अगले चुनावों में युवायों को कैसे आगे ला सकता है, कैसे आपस में जोड़ सकता है

१. संघे शक्ति:
संघे शक्ति ..यानि अगर एक साथ मिलकर काम किया जाये ..तो कुछ असंभव नहीं ..जैसे बूंद बूंद से ही सागर भरता है, वैसे ही ऐसे तमाम गुमराह करने वाले अँधेरे माहौल में अगर अच्छे लोग मिलकर, एक जुटकर काम करें ..तो मंजिलबहुत ही आसान हो जाएगी ..

किसी योग्य, ईमानदार उम्मीदवार के बारे में एक टेक्स्ट मेसेज, एक विडियो, एक सन्देश काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, ग्रुप चैट (Group Chat”) या मेसेज ब्रोडकास्टिंग के जरिये ये बेहतर तरीके से किया जा सकता है |
और ये एक दो मेसेज, विडियो, पिक्चर जब अच्छे उद्देश्य के लिए मिलकर फैलेंगे, तो फिर कई दूसरे भी इससे जुड़ते जायेंगे |

२. वॉकी-टॉकी 
कल्पना करो भारी से भारी भीड़ को चंद लोग कैसे नियंत्रित करते है, बेहतर सूझबूझ और एक बेहतर संवाद प्रणाली से .. वॉकी-टॉकी से बेहतर क्या हो सकता है ?
WeChat के Voice Chat फीचर को वॉकी-टॉकी के रूप में मतदान के दौरान बहुत बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है ..और ये रोचक भी लगेगा |

३. आस - पास को जानो:
 
कहते हैं, अगर जीत चाहिए तो सजगबनो….सतर्क रहो ..इसके लिए आपके आस पास क्या घटित हो रहा है, उससे
आपका परिचय प्रतिदिन होते रहना चाहिए, उसके लिए आपस में न्यूज शेयरिंग, लोकेशन आधारित चैट काफी मददगार हो सकती है |




४. कैद करो ..इन भ्रष्ट गुलामोंको ..


अंत में सबसे असरदार हथियार ..कैमरा”..जिससे इनकी नापाक हरकतों को ..जो अब पर्वतसी होती जा रही हैं को कैद करों फिर छोडो उसे आजाद" मैदान में जहाँ ये नंगेहो सके कुछ शर्म लगे …|



ये बात पहले भी सिद्ध हो चुकी है, इस तरीके के माध्यम से भी कई सफल क्रांतियाँ हो चुकी हैं, निर्भर करता है, उसे इस्तेमाल कैसे किया जाए

ये साल उम्मीदकी हैअबकी पछतानाना पड़े अभी बहुत आगे जाना है, सो अब और देरनही ..
जागो दोस्तों…..इस बार

यह पोस्ट IndiBlogger के द्वारा चलाये जा रहे ..Indian General Elections 2014 with social mobile apps” Contest के अंतर्गत लिखी गयी है |

इसी विषय मेरा एक लेख “English” में भी है, कृपया एक पधारें ..और सुझाव जरूर दें |